कंजूस अपनी बचत तो करता है, दूसरों के खर्च कराता है ।
मितव्ययी जरूरत पड़ने पर सामर्थ के अंदर कितना भी खर्च करता है, पर दूसरों की फिजूलखर्ची भी रोकता है ।
चिंतन
जिसमें याद ना आए वो तन्हाई किस काम की,
बिगड़े रिश्ते ना बने तो खुदाई किस काम की ?
बेशक इंसान को ऊँचाई तक जाना है,
पर जहाँ से अपने ना दिखें वो ऊँचाई किस काम की ?
(श्री संजय)
If you fail to achieve your dreams,
change your ways Not your Principles.
Trees Changes their Leaves, Not Roots.
(Mr. Noona – Mumbai)
उन बूढ़ी बुजुर्ग ऊँगलिओं मेँ कोई ताकत बाकी न थी,
मगर सिर झुका तो कांपते हाथों ने जमाने भर की दौलत दे दी ।
(श्रीमति नमिता – सूरत)
ख्वाहिशों से नहीं गिरते हैं फूल झोली में,
कर्म की शाख को हिलाना होगा ।
कुछ नहीं होगा कोसने से अंधेरे को,
अपने हिस्से का दिया खुद ही जलाना होगा ।
(श्री अरविंद)
The Perfect reason why a seesaw was made for two persons?
So that when you go down, there would always be someone special to lift you up again..!!
(Mrs. Neelam – Delhi)
‘प’ शब्द हमको बहुत प्रिय है ।
हम जिंदगी भर ‘प’ के पीछे भागते रहते हैं ।
जो मिलता है वह भी ‘प’ और
जो नहीं मिलता वह भी ‘प’ ।
पति- पत्नी- पुत्र -पुत्री -परिवार-
पैसा -पद-प्रतिष्ठा-प्रसंशा ।
‘प’ के पीछे पड़ते-पड़ते हम पाप करते हैं ,यह भी ‘प’ है ।
फिर हमारा ‘प’ से पतन होता है और
अंत मे बचता है सिर्फ ‘प’ से पछतावा ।
पाप के ‘प’ के पीछे पड़ने से अच्छा है
परमात्मा के ‘प’ के पीछे पड़ें..।
(श्री संजय)
अपनों का अभिशाप बहुत बड़ा,
पर अपना अभिशाप सबसे बड़ा –
इंद्रियों/धन/बल के दुरुपयोग से मिलता है ये अभिशाप
मुनि श्री सुधासागर जी
ग़ालिब ने यह कह कर तोड़ दी तस्बीह (माला)..
गिनकर क्यों नाम लूँ उसका जो बेहिसाब देता है ।
(डॉ. सुधीर – सूरत)
जानता हूँ मैं कि सब कुछ जानता है तू,
ऐ मेरे खुदा फिर भी छिपाता हूँ,
मैं हर खता ,किस कदर नादान हूँ मैं ।
(डॉ. अमित)
You are great, if you can find your faults.
You are greater, if you can correct them.
But you are greatest,
if you accept & love someone with their faults!
(Mr. Sanjay – Mumbai)
पं. श्री रतनलाल मुख्तार जी ने परिग्रह की सीमा का नियम लिया ।
मंहगाई बढ़ती गयी, उन्होंने एक बार खाना शुरू कर दिया, और बढ़ी तो वे आधी धोती पहनने लगे ।
परिस्थितियों के साथ नियम नहीं बदलने चाहिये, बल्कि अपने आपको बदलें ।
पाठशाला
हनुमान और रावण में प्रतिस्पर्धा हो गयी ।
रावण ने पहले घूँसा मारा हनुमान सहजता से झेल गये ।
हनुमान ने मारा तो रावण बेहोश हो गया ।
हनुमान दु:खी ।
कारण ?
रावण बचा कैसे ?
मेरी साधना का फायदा क्या हुआ !!
ज्ञान की साधना करते रहें और वह ज्ञान हमारा संसार समाप्त न कर पाये/संसार से वैराग्य उत्पन ना कर पाये, उस ज्ञान का क्या फायदा !!!
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