SPEED is calculated as ‘Miles per hour’.
But
Life is calculated as “SMILES per Hour”
So increase your SMILE And get Extra mileage in life…
(Mrs. Namita – Surat)
अर्थ* से अर्थ** के आकर्षण को अर्थहीन करें ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
* शास्त्र/गुरुवाणी के अर्थ
** धन दौलत
जड़* पर दृष्टि रहे तो, जड़ मज़बूत, गहरी होगी ।
जड़* का स्वभाव समझ आयेगा ।
* Root
मुनि श्री विनिश्चयसागर जी
चढ़ती रहें चादर मज़ार पर, और बाहर बैठा फ़कीर ठंड़ से ना मर जाये ।
मेरे पास वक़्त नहीं है नफ़रत करने का उन लोगों से जो मुझसे नफ़रत करते हैं,
क्योंकि मैं व्यस्त हूँ उन लोगों में जो मुझसे प्यार करते हैं ।
Some people say that meat gives strength to the body,
but we can observe the biggest and strongest animals in the world are pure vegetarian.
Sadhu Vaswani
Animals do not come to eat your meals, why you go and eat there meals?
Swami Prabhupada
वेग में तो पढ़े/बिना पढ़े सब बराबर हो जाते हैं ।
विकलता के साथ तो धार्मिक क्रियायें/वैराग्य भी सही नहीं है ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
मोह फोड़ा है,
ज्ञान उसे ढ़कने वाला खुरंट,
यदि ज्ञान रूपी खुरंट हटाते रहे तो घाव नासूर बन जायेगा ।
मोह की खुजलाहट तो होगी पर घाव को ढ़के ही रखना, जल्दी ठीक हो जायेगा ।
चिंतन
Sometimes you have to photoshop your life.
Touch up edges, adjust the tones, blur the background, focus on yourself & crop some people out.
(Mrs. Shuchi)
सारंगी जीवन है,
सारंगी के ज्ञान रूपी तारों को , साधना रूपी ऊँगुलियों से बजाया तो मधुर संगीत निकलेगा,
वरना ये सारंगी कवाड़ा हो जायेगी ।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
एक सज्जन बनारस पहुँचे।
स्टेशन पर उतरे ही थे कि एक लड़का दौड़ता आया,
‘‘मामाजी! मामाजी!’’ — लड़के ने लपक कर चरण छूए।
वे पहचाने नहीं।
बोले — ‘‘तुम कौन?’’
‘‘मैं मुन्ना। आप पहचाने नहीं मुझे?’’
‘‘मुन्ना?’’ वे सोचने लगे।
‘‘हाँ, मुन्ना । भूल गये आप मामाजी!
खैर, कोई बात नहीं, इतने साल भी तो हो गये।
मैं आजकल यहीं हूँ।’’
‘‘अच्छा।’’
‘‘हां।’’
मामाजी अपने भानजे के साथ बनारस घूमने लगे।
चलो, कोई साथ तो मिला। कभी इस मंदिर, कभी उस मंदिर।
फिर पहुँचे गंगाघाट, बोले कि “सोच रहा हूँ, नहा लूँ!”
‘‘जरूर नहाइए मामाजी!
बनारस आये हैं और नहाएंगे नहीं, यह कैसे हो सकता है?’’
मामाजी ने गंगा में डुबकी लगाई।
हर-हर गंगे!
बाहर निकले तो सामान गायब, कपड़े गायब!
लड़का… मुन्ना भी गायब!
‘‘मुन्ना… ए मुन्ना!’’
मगर मुन्ना वहां हो तो मिले।
वे तौलिया लपेट कर खड़े हैं।
‘‘क्यों भाई साहब, आपने मुन्ना को देखा है?’’
‘‘कौन मुन्ना?’’
‘‘वही जिसके हम मामा हैं।’’
लोग बोले, ‘‘मैं समझा नहीं।’’
‘‘अरे, हम जिसके मामा हैं वो मुन्ना।’’
वे तौलिया लपेटे यहां से वहां दौड़ते रहे।
मुन्ना नहीं मिला।
ठीक उसी प्रकार…
भारतीय नागरिक और भारतीय वोटर के नाते हमारी यही स्थिति है !
चुनाव के मौसम में कोई आता है और हमारे चरणों में गिर जाता है ।
“मुझे नहीं पहचाना!
मैं चुनाव का उम्मीदवार। होने वाला एम.पी.।
मुझे नहीं पहचाना…?”
आप प्रजातंत्र की गंगा में डुबकी लगाते हैं।
बाहर निकलने पर आप देखते हैं कि वह शख्स जो कल आपके चरण छूता था,
आपका वोट लेकर गायब हो गया।
वोटों की पूरी पेटी लेकर भाग गया।
समस्याओं के घाट पर हम तौलिया लपेटे खड़े हैं।
सबसे पूछ रहे हैं — “क्यों साहब, वह कहीं आपको नज़र आया?
अरे वही, जिसके हम वोटर हैं।
वही, जिसके हम मामा हैं।”
पांच साल इसी तरह तौलिया लपेटे, घाट पर खड़े बीत जाते हैं।
आगामी चुनावी स्टेशन पर भांजे के इंतजार में….
Every artist gives his own name to his work,
But there is no artist like a “Mother”,
Who gives birth to a child but gives Father’s Name !!!
(Mrs. Namita – Surat)
वैराग्य आने में चार प्रतिबंध होते हैं ।
- लोक – लोग क्या कहेंगे,
- स्वजन – लेने नहीं देते,
- शरीर – कमजोर है,
- संकल्प/विकल्प – संयास लिया तो, ऐसा होगा, तो क्या होगा ।
श्री कल्पेश भाई
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