अग्नि अशुद्धि को ही जलाती है, शुद्ध को नहीं ।
सोने को, सीता जी को (अग्नि परीक्षा के समय), आत्मा को नहीं जलाती, शरीर को ही जलाती है ।

श्री मेहुल

दुनिया में कोई भी चीज़ अपने आपके लिए नहीं बनी है।
जैसे:
दरिया – खुद अपना पानी नहीं पीता।
पेड़ – खुद अपना फल नहीं खाते।
फूल – अपनी खुशबु अपने लिए नहीं बिखेरते।
मालूम है क्यों?
क्योंकि दूसरों के लिए ही जीना ही असली ज़िंदगी है।

(श्रीमति नीलम जैन – दिल्ली)

इंसान को कभी भी घमंड़ नहीं करना चाहिये, क्योंकि शतरंज की बाजी खत्म होने के बाद राजा और मोहरे एक ही ड़िब्बे में रख दिये जाते हैं ।

(श्री दीपक जैसवाल – ग्वालियर)

छाता बारिश को तो नहीं रोक सकता, परन्तु बारिश में खड़े होने का हौसला अवश्य देता है ।
इसी प्रकार आत्मविश्वास सफलता की गारंटी तो नहीं देता, परन्तु सफलता के लिये संघर्ष करने की प्रेरणा अवश्य देता है ।

हर ख़ुशी है लोगों के दामन में,
पर एक हंसी के लिये वक़्त नहीं |

सारे रिश्तों को तो हम मार चुके,
अब उन्हें दफ़नाने का भी वक़्त नहीं |

सारे नाम मोबाइल में हैं,
पर दोस्ती के लिये वक़्त नहीं |

आखों में है नींद भरी,
पर सोने का वक़्त नहीं |

पैसों की दौड़ में ऐसे दौड़े,
कि थकने का भी वक़्त नहीं |

तू ही बता ऐ ज़िन्दगी,
इस ज़िन्दगी का क्या होगा |
कि हर पल मरने वालों को,
जीने के लिये भी वक़्त नहीं |

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