शिकायतें हो पर उसका भी सलीका होता है,
अदब से कही हर बात का वज़न होता है ।

(ब्र. रेखा दीदी)

विद्यार्थी यदि आज ध्यान लगाकर पढ़ाई करेंगे तभी कल को ध्यान* कर पायेंगे ।

*धर्मध्यान/शुक्लध्यान

आचार्य श्री विद्यासागर जी

इंसान ने वक़्त से पूछा – मैं हार क्यों जाता हूँ ?
वक़्त ने कहा –
“धूप हो या छाँव हो, काली रात हो या बरसात हो ।
चाहे कितने भी बुरे हालात हों,
मैं चलता रहता हूँ, इसीलिये मैं जीत जाता हूँ ।
तू भी मेरे साथ चल, कभी नहीं हारेगा ।”

ज़िंदगी पल-पल ढ़लती है,
जैसे रेत मिट्टी से फिसलती है ।
शिकवा कितने भी हों फिर भी हर पल हंसते रहना,
क्योंकि ये ज़िंदगी जैसी भी है बस एक ही बार मिलती है ।

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