Problems are like washing machines, they twist, they spin & knock us around.
But in the end we come out cleaner, brighter & better then before.
(Mr. Navneet)
अपने माथे पर यदि स्वयं टीका लगायें तो सही जगह पर और सही आकार का नहीं लगता है ।
यदि आप दूसरे के माथे पर लगायें, या दूसरा आपके माथे पर, तो सही लगता है ।
चिंतन
जो कान दूसरे की निंदा सुनते हैं, वे ज़हरीले साँप के बिल हैं ।
साँपों को निकालने के लिये धर्म-श्रवण रूपी बीन की धुन जरूरी है ।
श्रीमती बसंतीबाई
Heart is the only machine that works without any rest for years…
Always keep it “Happy” , whether it is your’s or other’s.
(Mr. Ravikant)
तथ्य को समझने के लिये जो संवाद होते हैं, वे तर्क हैं ।
तथ्य को काटने वाले संवाद कुतर्क हैं ।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
संसार के हर खेल और कार्य में कुछ नियम/बंधन होते हैं,
बंधन के बिना जीवन चलता नहीं है ।
अपने को बंधन में रखना उत्तम है,
दूसरों को रखना या दूसरों का बंधन मानना गुलामी/मोह है ।
या तो हम इंद्रियों और मन को बांध कर रखें या उनके बंधन में रह कर उनके गुलाम बन जायें ।
मुनि श्री कुन्थुसागर जी
There is no use of running fast. When you are on the wrong road.
So, first choose the correct way in your life….
(Mr. Deepak Jaiswal)
कलाकार भगवान को मूर्ति में ढ़ालता है,
भक्त मूर्ति को भगवान में ।
पिकासो
उत्तर दिशा में पवित्र कैलाश पर्वत है ।
उस दिशा में पर्वत को स्मरण करके हम नमस्कार करते हैं ।
क्या उस दिशा में अपवित्र क्षेत्र नहीं हैं ?
हैं, पर हमारी दृष्टि पवित्रता की ओर रहती हैं ।
चिंतन
When ‘I’ is replaced by ‘We’,
Even
‘Illness’
Becomes
“Wellness”.
हमें वो चार लोग आज तक नहीं मिले ?
जिनको मेरी Personal Life में इतना Interest है कि घरवाले हमेशा बोलते हैं….
चार लोग देखेंगे तो लोग क्या कहेंगे ।
(धर्मेंद्र)
बच्चों के हाथ से ज़हर हटा दिया तो क्या उनको मरण से आजाद कर दिया ?
यदि ज़हर की जगह हथेली पर स्मैक रख दिया तो क्या बच्चे मरण से स्वतंत्र हो गये ?
नहीं अब तो घुट घुट कर मरेंगे ।
मुनि श्री मंगलानंद जी
विदेशियों से तो आजादी मिल गई, स्वदेशियों* से कब मिलेगी ?
- *अपने लोग जो भ्रष्टाचार रूपी स्मैक खाने का प्रचलन बढ़ा रहे हैं ।
- *अपने लोग जो मोह रूपी स्मैक खा/खिला रहे हैं ।
Problems can either make you or break you….
A hammer breaks the glass but shapes the steel….
It is purely your choice…?
कुछ लोगों की सार्थकता दुनिया में खुश्बू की तरह रहती है, रोज महसूस तो होते हैं पर दिखाई नहीं देते हैं ।
(श्री अरविंद बड़जात्या)
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