सबसे ज्यादा संग्रह मनुष्य ही करता है,
चाहे वह चंदा हो या धन दौलत/परिग्रह ।
पाप/पुण्य का भी मनुष्य योनि में ही अधिकतम संग्रह होता है ।
ज्यादा बलवान/वैभवशाली सबसे अधिक करता है ।

चिंतन

खराब आचरण से खुद को नुकसान होता है ।
गलत ज्ञान से पूरे समाज को, क्योंकि ज्ञान दूसरों को परोसा जाता है ।

आचार्य श्री विभवसागर जी

बेईमानी का नकली सिक्का थोड़े दिन ही चलता है पर ईमानदारी की शक्ल में ही चलता है ।
देखा जाये तो ईमानदारी ही चलती है, बेईमानी नहीं ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

दो मुख्य कर्तव्य – “एक जीव की जीविका, दूजा जीव उद्धार” ।
कैद में पड़े इस जीव को भोजन तो जरूरी है सो जीविका, पर जीव को कैद से छुड़ाना महत्वपूर्ण कर्तव्य है ।

श्री लालमणी भाई

Every problem has (n+1) solutions, where n is the number of solutions that you have tried and “1” is that you have not tried.

ज़िन्दगी में कुछ खोना पड़े तो ये दो लाईन याद रखना…..

जो खोया है उसका गम नहीं, लेकिन जो पाया है वो किसी से कम नहीं ।
जो नहीं है वो एक ख्बाव है, और जो है वो लाज़बाव है ।

शराबी की लाल आंखों को दवा से ठीक नहीं किया जा सकता ।
मोह की लाली को हटाने के लिये ज्ञान की दवा पिलानी होगी, सिर्फ बाह्य क्रियाओं से हटने वाला नहीं है ।

चिंतन

बुज़ुर्ग वे आईने हैं, जिनमें हम अपना भविष्य देख सकते हैं ,
उनको देखकर हम अपना भविष्य सुधार सकते हैं ।
जिन्होंने गल्तियाँ की हैं, वे भुगत रहे हैं/पश्चाताप कर रहे हैं ,
जिन्होंने संयमित/ईमानदारी/वफादारी से जीवन जिया वे इज़्ज़त/आराम/सेवा पा रहे हैं ।

चिंतन

श्रीमद् रायचंद जी की सभा में एक व्यक्ति को किसी ने बीड़ी पीने का ईशारा किया, वह बीड़ी पीकर फिर सभा में आकर आत्मा की बातें सुनने लगा ।
रायचंद्र जी : वैसे तो आत्मा अनमोल है, पर कुछ लोगों के लिये उसकी कीमत 2 पैसे से भी कम है ।

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