बाह्य शत्रुओं से युद्ध करने में कर्मबंध होता है,
अंतरंग शत्रुओं से युद्ध करने में कर्म कटते हैं ।

चिंतन

जो नाव मुझे
उस पार ले जायेगी,
एक दिन,
उस पार पहुंचकर,
उसे भी छोड़ना होगा ।
ये जानते हुये भी,
मन
नाव से
कितना बंध जाता है !

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

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