कल्याण का मार्ग एकता में है,
अनेकता ही ने तो संसार बनाया है ।

क्षु. श्री गणेशप्रसाद वर्णी जी

एक दिन किसी ने मुझसे पूछा – कोई अपना तुम्हें छोड़कर चला जाये तो तुम क्या करोगे ?

मैंने हंसकर उसका ज़बाब दिया – अपना कभी छोड़कर जाता नहीं ,
और जो जाता है,वो अपना होता नहीं ।

(ड़ॉ. अमित)

बुंदेलखंड़ के राजा छ्त्रसाल का व्यक्तित्व बहुत आकर्षक था ।
एक महिला ने छत्रसाल जैसे व्यक्तित्व वाले बच्चे की प्राप्ति के लिये उनसे संबध बनाने की प्रार्थना की ।

राजा छत्रसाल – मैं तुमको अपनी माँ बना लेता हूँ ।

क्या भरोसा है ज़िंदगी का, इंसान बुलबुला है पानी का ।
जी रहे हैं हम कपड़े बदल बदल कर, एक दिन एक ही कपड़े में ले जायेंगे लोग हमें, कंधे बदल बदल कर ।

(श्रीमति रिंकी)

रावण ने सीता को अपनाने के लिये जब अपना रूप राम का रखा, तब उसने कहा –
“राम कौ रूप बनावत ही, मोहे मात सी लागत नारि पराई”

मुनि श्री सौरभसागर जी

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031