“Yes” and “No” are two short words which need a long thought.
Most of the things we miss in life are due to saying “NO” too soon or “YES” too late.

(Mr. Ravikant)

मनुष्य ही क्षमा धारण कर सकते हैं, देवता भी नहीं ।
देवता तो अमृत पीकर भी ईर्ष्या करते हैं ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

अपनी जितनी भावनायें हो, उतना हमें मिले ही, ऐसा नियम नहीं है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

(फिर वे भावनायें संसारिक हो या पारमार्थिक, मुख्यता है – मंद कषायी होने की ।

गिलास में मुठ्ठी भर नमक ड़ाल दो तो पिया नहीं जाता,
जबकि बड़े तालाब में ड़ालने से मिठास में कोई अंतर नहीं आता ।
यदि हम भी बड़े हो जाऐं तो ये छोटी मोटी निंदा आदि हमारे मीठेपन को नष्ट नहीं कर पायेगी ।

बड़े Shopping Mall के अंदर कोयले का व्यवसाय करने लगो तो हँसी के पात्र बनोगे,
टाल लेकर वही काम करो तो ठीक है।
मनुष्य पर्याय लेकर जानवरों की तरह व्यवहार करना बुद्धिमानी कैसे कहलायेगी ?

श्री रत्नत्रय -3

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April 8, 2022

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