If you do not know,
ask me.
If you do not agree,
argue with me.
But do not start judging me silently.

(Mr.Dharmendra)

ढ़ाई वर्षीय तनुशा बड़ों के साथ बैठी थी । उसके छोटे नाना धार्मिक चर्चा कर रहे थे । तनु बोर हो रही थी । बड़ों ने उसे देखा और कहा – अब तुम्हारा नम्बर है, कहानी सुनाओ ।
तनु ने कहानी में छोटे नाना को Crocodile से मरवा दिया ।
उसकी झूठ-मूठ की चाय, झूठे झूलों की Rides में सुख था, धर्म चर्चा में नहीं ।

हम बड़े भी तो झूठी चीजों में ही सुख मान रहे हैं – पैसे में, Power, रूप आदि में ।

चिंतन

जब भी चिड़िया बनाती है अपना घोंसला,
उसके मन में रहता है बहुत हौसला ।
ऊँचाईओं का ड़र नहीं होता उसे,
क्योंकि अंज़ाम से ज्यादा मज़बूत होता है फैसला ।।

(श्री मनीष – ग्वालियर)

अच्छे विचार, अच्छे चिंतन को जन्म देते हैं ।
अच्छे चिंतन, अच्छे संस्कार का निर्माण करते हैं ।
अच्छे संस्कार, अच्छा चारित्र गढ़ते हैं ।
और अच्छा चारित्र ही निर्वाण /मोक्ष ले जाता है ।

दु:ख छोड़ना आसान है,
सुख छोड़ना कठिन ।

ठंड़ से घबराकर कमरे में आना आसान,
ठंड़ में कमरे से बाहर जाना कठिन ।

आचार्य श्री विशुद्धसागर जी

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