“गलती” जीवन का एक पन्ना है, पर “रिश्ता” पूरी किताब है ।
जरूरत पड़ने पर गलती का पन्ना फाड़ देना लेकिन एक पन्ने के लिये पूरी किताब मत खो देना ।

(श्री मनीष – ग्वालियर)

कोई किसी के लिये नहीं रोता ।
रोते हैं, अपने राग के कारण ।

ज्ञानी के परिवारजनों का भी विछोह होता है, वह क्यों नहीं रोता ?

क्योंकि उसके राग कम होता है ।

आचार्य श्री विशुद्धसागर जी

अच्छी चीज़ पर भी अड़ना नहीं चाहिये ।
क्यों नहीं ?
यदि अड़ गये तो उससे भी अच्छी चीज़ कैसे मिलेगी !!

हमेशा ऊपर जाने के दरवाजे खुले रखें ।
वर्तमान कितना भी अच्छा क्यों ना हो, ऊपर उठने की संभावनायें बहुत रहती हैं, पर अड़ियल की प्रगति बंद हो जाती है ।

ड़ॉ. एस. एम. जैन

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April 8, 2022

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