क्या बीमार आदमी को झोंपड़ी से निकालकर महल में लाने से, वह निरोगी हो जायेगा ?
क्या कांच को सोने की अगूँठी में जड़वाने से, वह हीरा बन जायेगा ?

जब तक अंदर की कलुषता नहीं जायेगी, शांति आ नहीं सकती ।

जिसकी आने की तिथि निश्चित न हो,
ऐसे महमान के आने पर आप घबराते हैं, दुखी होते हैं या उनका स्वागत करते हैं ?

मृत्यु भी तो अतिथि है, उसका स्वागत क्यों नहीं करते ??

चिंतन

1) पिछ्ले नव-वर्षों में जितनी खुशियाँ मिली हों, वे सब इस नववर्ष में मिलें,
जितने धर्म-कर्म पिछ्ले नव-वर्षों में किये हों,वे सब इस नववर्ष में तथा अगले नये वर्षों तक करते रहें ।

2) नववर्ष में हम सब की कमजोरियाँ  कमजोर हों,
और मजबूतियाँ  मजबूत हों ।

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