प्रकृति ने गुरूत्वाकर्षण क्यों बनाया ?

ताकि हम धरती से लगे रहें ।

(घमंड़ में आसमान में ना उड़ने लगें)

ड़ॉ. पुनीत रस्तोगी

कमल खिलता है सूर्य के निमित्त से, बढ़ता है कीचड़ के निमित्त से,
वही कमल यदि धर्म रूपी ड़ंठल से अलग हो जाये तो वही सूर्य उसे सुखाने और कीचड़ उसे गलाने में निमित्त बन जाते हैं ।

आचार्य श्री विभवसागर जी

“मृत्यु” शब्द भयभीत लोगों की ईज़ाद है ।
जब जन्म ही नहीं हुआ तो मृत्यु कैसे !!

यह तो बस यात्रा है, इसीलिये पुराने लोग मृत्यु को “गुज़र गया”, “देहांत”, “देहावसान” कहते थे ।

ब्र. नीलेश भैया

कमल कीचड़ में पैदा होता है, कीचड़ में बढ़ता है, पर कीचड़ से निर्लिप्त रहता है ।
हम लोग भी संसार में पैदा होते हैं, संसार में ही बड़े होते हैं पर सिर्फ ज्ञानी लोग ही संसार से निर्लिप्त रहपाते हैं ।

महात्मा गौतम बुद्ध

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

November 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
30