मन लगाने के लिये सामूहिक क्रियायें करें,
भक्ति अकेले में सबसे अच्छी होती है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

हमें मालूम ना था कि आग इतनी गरम होती है,
पता तब चला जब हमारा खुद का घर जला ।

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

शब्द पर अटकने के बजाय, उसके आशय पर जाओ ।
शब्द में इतनी सामर्थ कहाँ कि शब्द के आशय का पूर्ण बखान कर सके ।

नय दर्पण – क्षु. श्री जिनेंद्र वर्णी जी

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April 8, 2022

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