दो भाईयों में बटवारा एक कीमती शीशे को लेकर अटक गया,
कौन ले !
गुरू के पास गये,उन्होंने शीशे को पटक दिया, दरार पड़ गयी ।

गुरू – शीशे में दरार तो सही जा सकती है पर सम्बंधों में नहीं ।

आचार्य महाश्रमण जी

समय के साथ –

योगी का चेहरा सौम्य और सुंदर होता जाता है,
भोगी का चेहरा विकृत और असुंदर होता जाता है ।

उपाध्याय श्री ज्ञानसागर जी

अतीत में जीना मोह है, भविष्य में जीना लोभ है और वर्तमान में जीना कर्मयोग है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

शांति चाहने वाले “No Admission” का बोर्ड़ लटका लेते हैं ।
(“पर” को “निज” में नहीं आने देते)

आचार्य श्री विभवसागर जी

अशांति चाहते हो तो “To Let” का बोर्ड़ लगा लो ।
“पर” को बुला बुला कर अंदर रखो ।

कु. विनिता जैन – बरेली

सोने चांदी के बाजार में सफाई-कर्मचारी नालियों के कचड़े में बहुत खोजबीन करते हैं, कचड़ा छोड़ते जाते हैं और सोने चांदी के टुकड़े जमा कर लेते हैं ।

श्री सौरभ जैन नोयड़ा

Archives

Archives

April 8, 2022

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930