मीठे फलों से बाजार भरा पड़ा है,
कड़वे भी तो पैदा होते होंगे !
वे क्यों नहीं दिखते ?
मीठे फलों के पेड़ लगाये जाते हैं/उगाये जाते हैं/जमा किये जाते हैं/भेंट में एक दूसरों को दिये जाते हैं ।

ऐसे ही, शुभ-भावों को उगायें, दूसरों के द्वारा उगाये हुओं को भी जमा करें, एक दूसरों के साथ बांटें ।

चिंतन

ज्ञान इतना उपयोगी नहीं,
ज्ञान होने से जो जीवन में सावधानी/विवेक आता है, वह उपयोगी है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

परमामृत और अमृत में  क्या अंतर है ?
अमृत खुद ही सर्वोच्च है, फिर परमामृत ?

अमृत लिया और दिया जाता है,
परमामृत, आत्मा में महसूस किया जाता है, जैसे संतों के जीवन में ।

श्री लालमणी भाई

चलते चलते देखता हुँ,
अनायास ही कोई ना कोई साथ हो जाता है ।
कुछ दूर,
वह साथ चलता है ।
फ़िर या तो ठहर जाता है या,
रास्ता ही बदल लेता है ।

मैं यह सोच कर आगे बढ़ जाता हुँ,
कि साथ चलने का सुख,
इतना ही होता है !!!

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी
(प्रेषक : श्रीमति शिल्पी जैन – शिकागो)

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April 8, 2022

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