यदि आप दूसरों को “टेका” (सहारा) न दे सकें तो कोई बात नहीं,
लेकिन “टीका” (निंदा) तो न करें ।
लोभ अदॄष्य पिंजरा है,
इसमें एक बार फंसे तो हमेशा के लिये कैद हो जाओगे ।
मान शरीर का भोजन है,
अपमान आत्मा का ।
संसार सागर के किनारे कभी मिलते नहीं है ।
चिंतन
अपने आपको हम आनंद में नहीं रख पाते,
तब दूसरों को आनंदित कैसे कर सकते हैं ।
चिंतन
किसी को पाने के लिये हमारी सारी खूबियां भी कम पड़ जाती हैं….!!
पर ये भी सच है –
किसी को खोने के लिये एक कमी ही काफी है ।
(धर्मेंद्र)
दूध पी लेने के बाद कुल्लड़ को फेंकते ही नहीं, जमीन पर जोर से मारते हैं और उसके टूटने की आवाज़ से खुश होते हैं ।
डा. पी. एन. जैन
बोलो तब तक, जब तक कोई ये न कहने लगे कि बस बंद करो ।
बैठो ऐसी जगह कि कोई उठने को न कहे ।
(शशि)
गर्व में सिर्फ घमंड़ है,
गौरव में घमंड़ तथा आनंद है ।
पं रतनलाल बैनाड़ा जी
‘E G O’ (EVIL GOING ON)
Is the only requirement to destroy any relationship.
So be the bigger person,
Skip the “E” and let it “GO”
(Miss. Ruchi)
अच्छा इंसान फूल की तरह होता है,
जिसे हम छोड़ भी नहीं सकते और तोड़ भी नहीं सकते,
तोड़ दिया तो मुरझा जायेगा और छोड़ दिया तो कोई और ले जायेगा ।
(ड़ा. अमित)
हम समझते कम हैं, समझाते ज्यादा हैं;
इसलिए सुलझते कम हैं, उलझते ज्यादा हैं !
श्री अंकुश
4 वर्षीय देवांशी जैन को उसके मामा ने 100 रू. का नोट भेंट किया ।
देवांशी ने नोट को उल्टा पकड़ा और वापिस करते हुये कहा – मुझे बुद्धु बना रहे हो, ये तो 001 का नोट है ।
संसार और परमार्थ की चीजें हमेशा एक दूसरे की उल्टी होती है ।
उसे कहाँ फ़ुरसत है, फ़रियाद सुनने की;
जो भी कहना है, कहो दो शब्दों में ।
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