पाप का बंध क्रियायें करने से ही नहीं, कभी कभी क्रियायें न करने से भी हो जाता है,
जैसे किसी असहाय की सहायता न करना ।

चिंतन

एक कौवा हर समय कांव कांव करता रहता था ।
राजा ने उसे पकड़वाकर कीचड़ में फिकवा दिया ।
कौवा – हम तो Mud Bath ले रहे हैं ।
कांटों में फेंका, तो बोला – कान छिदवा रहे हैं ।

खुश रहने का हालात से संबंध नहीं है, यदि हम चाहें तो हर हाल में खुश रह सकते हैं और यदि न चाहें तो किसी हाल में खुश न रहें ।

श्री लालमणी भाई

गोबर गिरकर, उठाते समय भी कुछ ना कुछ अपने साथ लेकर उठता है ।

श्री सौरभ जैन – नोयड़ा

हम उठने की चाह तो रखते हैं फिर गुणों को ग्रहण क्यों नहीं कर पाते !!
इसीलिये उठने के नाम पर गिर रहे हैं।

अकबर : सत्य और असत्य में कितना फ़र्क होता है ?
बीरबल : चार अंगुल का ।
कान से सुनी बात प्राय: असत्य, आँख से देखी प्राय: सत्य ।
कान और आँख में चार अंगुल का ही तो फ़र्क है ।

(श्री गौरव)

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