व्यवहार में, बेईमानी आटे में नमक के बराबर तो समाज झेल लेता है,
पर नमक में आटा नहीं गुथ सकता, नहीं चलता है ।

श्री लालमणी भाई

दो बच्चे देर से स्कूल पहुँचे, शिक्षक के देर से आने का कारण पूछने पर एक बच्चे ने बताया कि –
उसका 1 रूपये का सिक्का खो गया था, उसे खोजने में देरी हो गई ।
दूसरे ने बताया –
इसके सिक्के के ऊपर मैं पैर रखकर खड़ा था और जब वो वहाँ से हटा , तब वह सिक्का उठाकर मैं यहाँ देरी से पहुँचा ।

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

हम सब की मोक्ष जाने में देरी इन्ही कारणों से हो रही है ।
कोई परिग्रह को खोजने में लगा है,
कोई दूसरे की परिग्रह को हड़पने में ।

ठंड़ी हवा के लिये खिड़की खोलोगे तो , मक्खी मच्छर तो आयेंगे ही ।

श्री सौरभ जैन – नोयड़ा

(जमाने की सुहावनी हवा लोगे, तो समाज में फैली विकृतियां आयेंगी ही )

पूज्य गुरूवर मुनि श्री के मंगल प्रवचन जिनवाणी चैनल पर प्रात: 10.30 बजे, सायं 5:25बजे एवं रात 9.15 प्रसारित हो रहे हैं ।
मंगल प्रवचन सुनकर धर्मलाभ लें ।

बिजली की बचत के समर्थन में कारण बताये जाते हैं –
1. देश में बिजली की कमी
2. बचत
3. वातावरण की सुरक्षा ( खास तौर से Thermal power में )

पर अहिंसा का कारण चर्चा में बहुत कम आता है,
जबकि अहिंसक समुदाय के लिये ये बहुत महत्वपूर्ण है ।
बिजली चाहे किसी भी प्रकार से उत्पादित हो, हिंसा तो बहुत होती ही है ।
Atomic और Thermal power में पानी को उबालकर भाप बनाई जाती है, जिससे Turbines चलतीं है ।
विचार करें ! बिना छने पानी में कितने जीव मरते होंगे ?
Hydraulic power में भी पानी को turbine में भेजने से पहले बड़े बड़े जीव जाली में फंस कर या trap हो कर मर जाते हैं, छोटे छोटे जीव turbine में जाकर कट कट कर मरते हैं।
Solar energy में हिंसा सबसे कम है ।

उपरोक्त कारणों को देखते हुये क्या हमको बिजली की खपत कम से कम नहीं करना चाहिये ?

चिंतन

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