श्रीमति शकुंतला जी की आर्यिका दीक्षा सोनागिर जी में 23 मई 2010 को संपन्न होनी थी । Programme पता करने के लिये, उनके पुत्र श्री पंकज को  Phone किया । श्री पंकज के दो नं. मेरे Mobile की Memory में  Save थे – पहला ‘Shop’ का, जिसके लिये पंकज के नाम के आगे ‘S’ लगाया गया था, दूसरा नं. ‘Mobile’ का था जिसे नाम के साथ ‘M’ लगाकर Save किया गया था ।
Dial करते समय आंखों पर चश्मा नहीं लगाया था, इस वजह से ‘Mobile’ की जगह ‘Shop’ वाला नं. Dial हो गया । गलती पता लगने पर दूसरा नं. Mobile वाला लगाया ।
मैंने पंकज  से बोला –

दृष्टि सही नहीं हो तो, Dial करो ‘M’ For ‘मोक्ष’ – Call चली जाती है ‘S’ For ‘संसार’ को  ।

चिंतन

बैल को बैल क्यों कहते हैं ?

बैल के घंटी इसलिये लटकी है कि  कोई जब उसे भगवान का नाम सुनाये तो वो अपना सिर इधर उधर हिलाने लगता है, ताकि भगवान का नाम कान में ना पड़ जाये ।

विचार करें – कहीं हम बैल तो नहीं हैं ?

एक दिन एक चूहा Dustbin में पूरा ना घुसकर वापस आ गया, क्योंकि उसकी Surface चिकनी थी ।
लेकिन हम संसार के चक्रव्युह में बाहर निकलने की चिंता किये बिना, घुसते ही जाते हैं ।

चिंतन

ज्ञायक बन गायक नहीं, पाना है विश्राम;
लायक बन नायक नहीं, जाना है शिवधाम।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

आगे बढ़ने से पहले, जो पहले नियम लिये हैं, उन्हें देख लो, विचार कर लो ।
पड़ौसी की दूसरी दुकान देखकर, अपनी दूसरी दुकान मत खोलो ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी (द्वारा- मुनि श्री आर्जवसागर जी)

हम सब चारों गतियां हर समय बांधते रहते हैं ,वे कर्म हमारी आत्मा से चिपकते रहते हैं ।
जब भी विपरीत परिस्थितियां उपलब्ध हों तब करना बस यह है कि –
1. पहले देवताओं जैसा व्यवहार करें, जैसे – भाई साहब ! ऐसे मत बोलिये ।
2. भाई साहब ना मानें तो थोड़ा धमकायें, मनुष्य की तरह ।
3. फिर भी ना मानें तो धमकी बढ़ाकर सींग मारने की स्थिति बना दें – पशुत्व ।
4. अंत में नारकियों जैसा व्यवहार कर सकते हैं, ताकि अगली बार सामने वाले की आपको छेड़ने की हिम्मत ना पड़े ।
इस क्रम को Adopt करने से धीरे-धीरे आपके व्यवहार में से नारकीत्व/पशुता कम होती जायेगी और देवत्व/मनुष्यता बढ्ती जायेगी, क्योंकि अधिकतर Cases देवत्व और मनुषत्व में ही निपट जायेंगे ।

क्या सोचा ?

चिंतन

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

November 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
30