सुविधाओं में जितना उलझोगे, दुविधायें उतनी ही बढ़ेंगी।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

आज कोयल की आवाज़ इस सीज़न में पहली बार सुनी।
शुरु में तो अजीब सी आवाज़ आ रही थी, काफ़ी देर बाद सुरीला स्वर निकला।
कारण ?
8-9 माह का अंतराल आ गया था/ अभ्यास नहीं था।

चिंतन

भेद-विज्ञान श्रद्धा तथा ज्ञान से नहीं होता बल्कि प्रज्ञा से होता है।
जैसे दूध में से घी को अलग करना सिर्फ ज्ञान से नहीं विधिवत क्रिया से होता है।

निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

जीर्णोद्धार पुराने मंदिरों का करते हैं/ आवश्यक भी है।
पर अपनी आत्मा का मंदिरों से भी ज्यादा आवश्यक तथा महत्वपूर्ण है।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

इस जीवन में किसी ने लगातार पाप किये पर मरते समय/ अगले जीवन के निर्णय का समय आने पर भाव बहुत अच्छे हो गये/पश्चातापादि कर लिया। तो अगले जीवन में मनुष्य तो बनेगा पर जीवन भर दु:खी रहेगा।
इसका विपरीत… जीवन भर अच्छे काम, अंत में भाव खराब… जानवर बनेगा पर ठाट से सेवा होगी।

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

(यदि पाप इतने ज्यादा किये कि नरक जाना पड़ा तो बड़े-बड़े पुण्य भी छोटे से छोटा फल भी नहीं दे पायेंगे)

सिगरेट पीते समय भगवान का नाम लेने से, सिगरेट छूटने की संभावना रहेगी।
भगवान का नाम लेते समय सिगरेट पीने से भगवान के नाम छूटने की संभावना होगी।

मुनि श्री अरुणसागर जी

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