काँपते हाथों को रोकने के लिये कहते हैं…. “साधो”।
साधु वही जो विचलित होते मन को साध ले।
ब्र. डॉ. नीलेश भैया
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साधु को परिभाषित किया है वह पूर्ण सत्य है।। साधु कभी भी विचलित नहीं होते हैं, क्योंकि वह साधना में लीन रहते हैं, इसके कारण मन पर नियंत्रण रहता है। साधना के कारण वह सभी कष्ट झेलने में समर्थ रहते हैं।
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साधु को परिभाषित किया है वह पूर्ण सत्य है।। साधु कभी भी विचलित नहीं होते हैं, क्योंकि वह साधना में लीन रहते हैं, इसके कारण मन पर नियंत्रण रहता है। साधना के कारण वह सभी कष्ट झेलने में समर्थ रहते हैं।