Month: December 2025
जिन दर्शन/पूजा
जिन दर्शन…. जैनों का लक्षण है। जिन पूजा…..जैनों का आवश्यक है। मुनि श्री सुप्रभसागर जी
सुख
संसारी सुख… हर सुख के पीछे दु:ख जैसे भोजन बनाने में दु:ख, उसे सुख की आशा कि परिवारजन खुश होंगे। दु:ख का प्रतिकार ही
उदीरणा
श्रमण तथा श्रावक दोनों ही उदीरणा करते हैं: श्रमण पापकर्म की तथा श्रावक पुण्यकर्म की। श्रमण जितनी ज्यादा सर्दी सहेंगे, उतनी ज़्यादा पापकर्मों की उदीरणा
मोक्ष
सांकृत्यायन जी ने लिखा है…मोक्ष घुमक्कड़ों को ही होता है। क्योंकि उनका कोई व्यक्तिगत/ स्थायी ठिकाना नहीं होता, बहुत दिन ठहरे पानी में तो कीड़े
प्रीति
भय दिखाकर प्रीति कैसे हो सकती है ! कुदेवों से भय तो हो सकता है (मिथ्यादृष्टियों को), पर उनसे भी प्रीति कैसे हो सकती है
द्रव्य / पदार्थ / तत्त्व
द्रव्य जब किसी पद पर स्थापित हो जाता है तो पदार्थ कहलाने लगता है। उसका जो सार होता है, वह तत्त्व हो जाता है। निर्यापक
नॉनवेज क्यों नहीं ?
नॉनवेज में हिंसा का कारण बताने पर कुतर्क दिए जायेंगे। समझायें कि यह गंदा होता है क्योंकि इसमें खून, मांस, हड्डी आदि होते हैं। जबकि
अगुरुलघु
यह सब गुणों को शक्ति देता है जैसे खजांची। अगुरुलघु सब द्रव्यों (पुद्गल में भी) में पाया जाता है। सिद्ध पर्याय को नीचे नहीं गिरने
पाप / पुण्य
शिष्य…कौन सी आदत अच्छी, कौन सी बुरी और यह जीवन में कैसे आती हैं ? गुरु ने कुटिया के एक तरफ औषधि के पौधे बुववाये,
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