Month: December 2025
कल्याण
आगम समझ आता नहीं, हमारा कल्याण कैसे होगा ? कल्याण आगम जानने से नहीं, उस पर श्रद्धा रखने से होता है। तभी तो णमोकार समझ/
आधुनिक उपकरण
क्या भगवान के ज्ञान में आधुनिक उपकरण मोबाइल आदि नहीं था? यदि था तो उन्होंने ऐसे सुविधाजनक उपकरणों के बारे में बताया क्यों नहीं? पिता
अनुयोग
बनतीं हैं भूमिकाएँ प्रथमानुयोग से, आतीं हैं योग्यताएँ करणानुयोग से, तब पकतीं हैं पात्रताएँ चरणानुयोग से, फिर आत्मा झलकती द्रव्यानुयोग से। समाधि भक्ति में क्रम
उपकार
एक गाँव में सब स्वस्थ। सम्मान करने अधिकारी आये। पर एक व्यक्ति मरियल सा दिखा। ये कौन है ? ये गाँव का डॉक्टर है। आचार्य
आत्महत्या
क्या राजा श्रेणिक जो क्षायिक सम्यग्दृष्टि, तीर्थंकर प्रकृति का बंध किये हुए थे, उन्होंने आत्महत्या की होगी ? कोई बाधा नहीं क्योंकि वे चौथे गुणस्थानवर्ती
धन
धन का संबंध तो हमेशा परेशानी के साथ ही रहता है। कम हो तो दिन में परेशानी, ज्यादा हो तो रात में। (एन. सी. जैन
गणधर के शिष्य
गणधर के शिष्य “गुणधर” (गुणों के धारक)। उत्तम – सम्यक् चारित्र के धारक। मध्यम – सम्यग्दर्शन के धारक। जघन्य – सिर्फ नाम के धारक जैसे
नम्रता
बड़ों के प्रति नम्रता कर्तव्य है, तो हम-उम्र के प्रति विनय की सूचक, अनुजों के प्रति कुलीनता की द्योतक एवं सबके प्रति सुरक्षा है। आचार्य
समवसरण
कुबेर समवसरण को विक्रिया से क्यों नहीं बना लेते ? Real का Feel नहीं आयेगा। भगवान के लिये नकली का प्रयोग ? भक्त्ति की उत्कृष्टता।
Recent Comments