Month: December 2025

नया / पुराना

संसार में कुछ नया नहीं, कर्म भी (जो उदिष्ट हैं/ पंच परावर्तन पुनरावृत्ति है)। धर्म में नयापन है (क्योंकि हर क्षण भावों/ अनुभूति के अनुसार

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विकास

संसार तथा परमार्थ में विकास के लिये … एक आदर्श होना चाहिये जैसे भगवान। आदर्श को समझने के लिये गुरु का अवलम्बन ज़रूरी है। उनके

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पंचम गति

ऊपर वाली, संयम से प्राप्त। नीचे वाली (निगोद) असंयम से प्राप्त। छुटकारा –> पहला कदम – व्यसन त्याग। दुर्भाग्य –> सभ्यता के नाम पर व्यसनी

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छोटों को महत्व

छोटों को महत्व… इकाई से ही दहाई आदि बड़ी-बड़ी संख्यायें बनतीं हैं। इकाई को महत्व नहीं देंगे तो दहाई बनेगी कैसे ! मुनि श्री सुप्रभसागर

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सर्वज्ञ

सर्वज्ञ सबको कैसे जान लेते हैं ? खुद को जानने से सबको जान लेते हैं। क्योंकि खुद को जानने से जीव के स्वरूप को जान

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सुख

सुख चाहते हो तो सद्गृहस्थ बनो। सच्चा सुख चाहते हो साधु बनो। चिंतन

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निश्चय-संघ

मनचाहा संघ परिवर्तन चाहने पर आचार्य श्री विद्यासागर जी ने अकेले रहने का आदेश दिया। विदा के समय आचार्य श्री ने कहा… निश्चय-संघ तो रत्नत्रय

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आलस / हिंसा

विचार किया !… जरा से आलस से (बिजली न जलाना/ लापरवाही से चलना) हम अपने जूतों के नीचे कितने कीड़ों की लाशों को लेकर घूम

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छूने से अशुद्धि

मुनि को आहार को जाते समय यदि कोई भक्ति के अतिरेक/ अज्ञानतावश पैर छू ले तो अपवाद स्वरूप अशुद्धि नहीं मानना। आगम में कथानक आता

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मृत्यु में वेदना

क्या मृत्यु में वेदना होती है? (एन. सी. जैन – नोयडा) नहीं बीमारी/ Accident की वेदना हो सकती है। पक्षियों आदि को देखें कितनी शांति

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मंगल आशीष

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December 11, 2025