Month: July 2026
आहार
सन् 1991 में मुक्तागिरी में आहार के बाद आचार्य श्री विद्यासागर जी ने शिष्यों को कहा –> पंचम काल है आहार के लिए उठना तो
प्यास
पानी को भी पानी की प्यास होती है तभी तो नदी समुद्र की तरफ दौड़ती है। यदि यह प्यास समर्पण के लिए हो तो फिर
मूलनायक
मूल –> मुख्य, जो प्रतिमा वैदी के बीच/ ऊपर विराजमान हो। मूलनायक का वर्णन शास्त्रों में नहीं मिलता। अकृत्रिम चैत्यालयों में तो एक वेदी पर
आत्मा
“कौन बनेगा करोडपति” टी. वी. प्रोग्राम में कठिन प्रश्नों के जबाब Elimination से निष्कर्ष पर आते हैं। ऐसे ही आत्मा के बारे में जानना बहुत
तीसरे गुणस्थान में आयुबंध ?
तीसरे गुणस्थान में आयुबंध क्यों नहीं ? तीसरे गुणस्थान में ना तो मिथ्यात्व की, ना ही सम्यक्त्त्व की तीव्रता इतनी होती है कि वह आयुबंध
जीव रक्षा
वैष्णव मतानुसार श्रीकृष्ण ने छोटा गोवर्धन उठाया, हनुमान ने तो हिमालय का बड़ा पर्वत खंड*, फिर प्रसिद्धि कृष्ण को ज़्यादा क्यों ? कृष्ण ने बहुत
अज्ञान
ज्ञान के पहले “अ” लगने पर अज्ञान। जीव के पहले “अ” लगने पर “अजीव। सो अज्ञान का सम्बंध अजीव से हुआ। जितनी अजीव की जानकारी,
पूजादि
पूजा आदि स्टेशन पहुँचने की क्रियायें हैं। व्रत आदि रेल/ धर्म/ मोक्ष मार्ग की यात्रा। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
एकेंद्रिय
पाँचों एकेंद्रिय हमारे जीवन के आधार हैं। विडम्बना –> सबसे ज्यादा दोहना/ विराधना इन्हीं की करते हैं। हम तो इनसे क्षमा माँगने योग्य भी नहीं
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