Month: October 2026
बच्चों का बिगड़ना
पेड़ के पत्ते सड़/ सूख/ पीले हो रहे हैं, सब चिंतित हैं। उसे किस जमीन में रोपा, कैसा खाद, सडा़ पानी दिया/ दे रहे हैं,
व्यवस्था
पौधों का संस्थान हुण्डक होते हुए भी, Symmetry भी दिखाई देती है। हम समचतुरस्क संस्थान वाले होते हुए भी कोई अनुशासन नहीं ! चिंतन
प्रमाद
एक स्थिति में पड़े रहने से कठोरता आ जाती है जैसे जल का बर्फ बन जाना। बर्फ जलाती है, इसलिए जल का नाम पड़ा होगा।
श्रुतज्ञानी / प्रमाण
श्रुतज्ञानी के वचन को प्रमाण किस अपेक्षा से कहा ? श्रुतज्ञानी इतने संस्कारित हो जाते हैं कि उनके वचन प्रमाण बन जाते हैं। मुनि श्री
उपदेश / ज्ञान
उपदेश पात्र तथा कुपात्र को भी, जैसे हो उसे ही व्यवस्थित करने। ज्ञान पात्र को ही जैसा गुरु चाहते हैं, वैसा बनाने को। निर्यापक मुनि
भाव
चरणानुयोग के अनुसार दया/ अब्रह्म क्षयोपशम-भाव, कर्मोदय से नहीं। ज्यादातर बचने वाले अपने पुण्य-उदय से नहीं, बचाने वाले के भाव से/ उसके पुण्य की उदीरणा
सुपात्र दान
सुपात्र (साधु) को दान देने का एक और फायदा -> सुपात्र को इच्छा/ अपेक्षा नहीं, ऐसों को दान देने से हमारी अपेक्षा/ इच्छा कम होगी।
निस्सारता
बारह भावनाओं में अनित्य भावना से लेकर आस्रव तक सात भावनाएँ संसार की निस्सारता को दर्शाती हैं। दायरा भी क्रमश: कम-कम होता जाता है संसार
फल
जैसा खेत/ बीज, वैसी फसल। सुपात्र की पूजा से पूजक को सम्मान, दान से भोग/ इच्छापूर्ति, भक्ति से सुंदरता(असुंदर भी सुंदर लगने लगता है)। मुनि
अनेकांत / प्रमाण
अनेकांत और प्रमाण में अंतर क्या है ? योगेंद्र अनेकांत धर्म है, प्रमाण जानने का साधन है। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी
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