Category: अगला-कदम

बंध

अभव्य के जघन्य बंध नहीं होता है । बाई जी

Read More »

मतिज्ञान

इसमें पूर्णज्ञान होता है (धारणा तक) आभास नहीं, जातिस्मरण भी इसी से । श्रुतज्ञान आगे का विश्लेषण । मुनि श्री निर्वेगसागर जी

Read More »

दर्शन और मन:पर्यय

जैसे श्रुतज्ञान से पहले दर्शन नहीं होता, क्योंकि श्रुतज्ञान मति पूर्वक ही होता है और मति से पहले दर्शन होता ही है । ऐसे ही

Read More »

क्षयोपशम

वीरांतराय, ज्ञानावरण तथा चारित्र मोहनीय का क्षयोपशम साथ साथ, एक दूसरे के पूरक/सापेक्ष हैं – द्रव्य संग्रह मुनि श्री निर्वेगसागर जी

Read More »

कषाय – बंध/उदय

बंध तो 4 कषायों तक का एक साथ हो सकता है, पर उदय एक-एक का । मुनि श्री कुंथुसागर जी

Read More »

भेदज्ञान

चौथे गुणस्थान में भेद- ज्ञान पर श्रद्धा, आगे के गुणस्थानों में भेद- ज्ञान घटित । आचार्य श्री विद्यासागर जी

Read More »

शुभ/अशुभ

सत्ता में यदि शुभ वर्गणायें अधिक हैं तो वे अशुभ को अपने रूप में परिवर्तित कर लेंगी । मुनि श्री प्रमाणसागर जी

Read More »

जीव समास

संयम मार्गणा में असंयम तथा सम्यक्त्व में मिथ्यात्व क्यों लिया गया ? जीव बहुत बड़ी संख्या में इन श्रेणियों में भी पाये जाते हैं । संयम/सम्यक्त्व

Read More »

मंगल आशीष

Archives

Archives
Recent Comments

July 9, 2015

March 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
3031