Category: अगला-कदम
भोगभूमिज
भोगभूमजियों में पुरुष का मरण जम्हाई से होता है, स्त्रियों का छींक से। छींक में कम समय लगता है, जम्हाई में ज्यादा। इससे पुरुष की
सत्य
कषायों को मंद किये बिना किसी की भी स्थितिकरण तथा उपगूहन नहीं कर सकते। स्थितिकरण तथा उपगूहन किये बिना, सत्य खोजा नहीं जा सकता। मुनि
ज्ञान
कहा जाता है कि अकेला एक ज्ञान “केवलज्ञान” होता है। लेकिन विशेष परिस्थितियों में मतिज्ञान भी अकेला रह सकता है जैसे शिवभूति मुनिराज को णमोकार
नैगम नय
द्रव्य नैगम नय… अयोग्य राजकुमार को राजा कहना, राजा बन भी सकता है न भी बने। भावी नैगम नय… अरिहंत को सिद्ध कहना, नियम से
उपयोग / लब्धि
उपयोग में एक समय में एक ही ज्ञान होता है। अन्य ज्ञान कर्मों के क्षयोपशम से लब्धि रूप रहते हैं। केवलज्ञान हमेशा उपयोग रूप ही
समय
एक-समय, निश्चय काल की अपेक्षा –> द्रव्य, व्यवहार काल की अपेक्षा –> पर्याय। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी (जिज्ञासा समाधान)
अयोग केवली / नोकर्माहार
अयोग केवली के नोकर्माहार नहीं रहता तो शरीर कैसे चलता है ? आचार्य श्री विद्यासागर जी – पाप त्याग के बाद भी अल्प रहे संसार।
सर्वोत्तम
जब बुद्धि को विश्राम देते हैं तो सर्वोत्तम निकलता है क्योंकि आत्मज्ञान Takeover कर लेता है। चाहे संगीत हो या परमार्थ। भगवान जब श्रेणी माढ़ते
अचल-प्रदेश
धर्म, अधर्म और आकाश के भी अचल-प्रदेश होते हैं। मुनि श्री सौम्य सागर जी (जीवकांड-576 – 28 जून)
क्षयोपशम
कर्मों के एकदेश क्षय या उदयाभावी क्षय तथा एकदेश उपशम को क्षयोपशम कहते हैं। क्षुल्लक श्री जैनेंद्र वर्णी जी (कर्म सिद्धांत)
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