Category: चिंतन
परमात्मा
यदि पर की ओर देखना ही है तो “पर की आत्मा” की ओर क्यों न देखें! ताकि आप परमात्मा बन सकें। चिंतन
अबुद्धिपूर्वक
हर क्षेत्र में Best Performance अबुद्धिपूर्वक ही होता है जैसे वाद्य बजाते समय। शांतिपथ प्रदर्शक क्योंकि जब बुद्धि विश्राम करती है तब आत्मा Takeover कर
तप
सोना तप कर शुद्ध, चमकदार ही नहीं अपनी अकड़ छोड़ मुलायम हो जाता है। यदि हम तपने से घबराते हैं तो अपने को सोना नहीं,
कमाई / दान
उच्छवास/ Inhale – श्वास अंदर लेना। प्राण/ अपान/ श्वास/ Exhale – बाहर निकालना। श्वास अंदर लेते हैं तो बाहर भी निकालना ज़रूरी है, अन्यथा प्राण
राग
जानवर राग तथा द्वेष में एक सी भाषा बोलते हैं (जैसे कुत्तों का भौंकना)। मनुष्य राग में तो राग/ मोह करता ही है, द्वेष का
पुरुषार्थ / भाग्य
पुरुषार्थ—> जन्म लिया है तो उड़ना तो होगा ही (वरना हिंसक जीव घात कर देंगे)। भाग्य—> अंत में धरातल पर आना(मरण) भी निश्चित है। चिंतन
प्राकृतिक / अप्राकृतिक
शादी में हल्दी(प्राकृतिक) चढ़ते समय कपड़ों पर हल्दी लग गयी। शरीर को स्वास्थ्यवर्धक तथा एक दो धुलाई में साफ। सामूहिक कपड़े धुलते समय रंगीन कपड़ों
उपकार
प्राय: हम उन पर उपकार करते हैं जिन्होंने पहले हम पर उपकार किया हो। यदि सभी यही सोचेंगे तो उपकार करने की पहल कौन करेगा
दुःख
व्यक्ति जीवित है/ होश में है, परीक्षण के लिये नुकीली चीज पैरों में चुभा कर देखते हैं। दुःख भी ऐसे ही हैं, हमको एहसास दिलाते
आत्मा / शरीर
हम मकान क्यों/ कब छोड़ते हैं ? Contract की अवधि पूरी होने पर। समय पूरा होने से पहले मकान जीर्ण-शीर्ण हो जाये। आत्मा भी शरीर
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