Category: डायरी
वाकपटुता
नया व्यक्ति गाँव में पहुँचा। पूछा –> यहाँ के लोग कैसे हैं ? मैं ही ईमानदार हूँ (पूरे गाँव के बारे में कथन हो गया)।
विचार
अकेला कोई रहना नहीं चाहता। दो होते ही… तीन…चार। तालाब में पत्थर फेंकते ही एक, फिर अनेक लहरें उठ जाती हैं। ऐसे ही विचार एक
नकल
एक विद्यार्थी दूसरे को पीट रहा था। कारण ? दूसरे ने गलत जबाब लिखा था, पहला उसकी नकल कर रहा था। नकल करनी हो तो
सकारात्मक सोच
माली राजा को रोज़ाना फल लाकर देता था। राजा एक खाता/ रखता, दूसरा माली के ऊपर फेंकता। माली कहता “अच्छा हुआ”। पूछा, ऐसा क्यों कहता
दृष्टि
मोटे पेट वाला व्यक्ति गोल्फ़ खेलने गया। बॉल पास में रखी तो दिखी नहीं, दूर रखी तो वहाँ स्टिक पहुँचे नहीं। हमारी भी दूर/ दूसरों
सकारात्मकता
वैज्ञानिक आइंस्टीन की सालों की मेहनत अचानक प्रयोगशाला में आग लगने से समाप्त हो गई। आइंस्टीन…. अच्छा हुआ मेरी गलतियाँ समाप्त हो गईं, अब नये
बंध / अबंध
भगवान महावीर से उनके सबसे बड़े शिष्य गौतम जी ने पूछा… आप भी इस संसार में, मैं भी; पर आप अबद्ध (संसार/ कर्मों से), मैं
निवेश
अपने अस्तित्व को बनाये रखने के लिये धनोपार्जन आदि क्षेत्रों में निवेश करते रहते हैं। शुद्ध विचारों का निवेश नहीं करेंगे तो शुद्ध का उत्पादन
निजता
दूसरा (जैसा) बनने के लिये की खुद/ निजता की हत्या करनी पड़ती है। फिर भी दूसरे तो बन नहीं पाते। दूसरे को आदर/ प्रमुखता देने
धर्म / धर्मात्मा
धार्मिक क्रियाएँ तो बहुत लोग बहुत सारी करते हैं पर धर्मात्मा वही जो सुख (पुण्योदय) में दुःखी हो (कि भोगना पड़ रहा है) तथा दुःख
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