Category: डायरी

कोरोना

गुरु/धर्म कह-कह कर थक गए कि… “करो ना, करो ना”(*), यदि कर लिया होता, तो आज यह न कहना पड़ता कि… “करो ना”(**) (*)…..जो करने

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संघर्ष

संघर्ष एक ऐसा केन्द्र है जहाँ…. हताशा का व्यास कितना भी बढ़े लेकिन…. संभावनाओं की परिधि कम नहीं होती….! (सुरेश)

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Ongoing Process

The river ending in the sea is not the end of story. The sea water again evaporates and rains to become a river. Moral: See

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घृणा / क्रोध

घृणा और क्रोध अम्ल की तरह हैं। वे उन्हीं बर्तनों को बर्बाद कर देते हैं जिनमें वे रखे होते हैं। ???? ब्र.रेखा दीदी ????

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“ना” कहना

“ना” कहना भी एक कला है, इसको सकारात्मक तरीके से ही कहना चाहिये ।

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धर्म

धर्म… क्रिया नहीं, प्रयोग है । सिर्फ मंदिर के लिये नहीं, हर ज़गह के लिये है ; कुछ समय के लिये नहीं, हर समय के

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सच्चे गुरु/भक्त

सच्चा गुरु पवित्र नदी है, हालांकि भक्त उसी नदी का जल है, पर लोटे में है, विशालता नहीं, जिसमें नाव नहीं चल सकती (यानि औरों

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मंगल आशीष

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