Category: डायरी
प्रभु-कृपा
मांगने पर तो मूल्यहीन वस्तुयें ही मिलतीं हैं जैसे भीख । बिनमांगे मूल्यवान जैसे वृक्ष से छाया/ अग्नि से उष्णता/ वर्फ से शीतलता/ फूल से
सत्य
घड़ी बंद करने से घड़ी तो बंद हो सकती है, पर समय नहीं; झूठ छिपाने से झूठ तो छुप सकता है, पर सत्य नहीं ।
माता / पिता
माँ सोचती है… बेटा आज भूखा ना रहे, पिता सोचता है कि बेटा कल भूखा ना रहे । बस यही दो सम्बन्ध ऐसे हैं संसार
ज़रूरत
संसार ज़रूरत के नियम पर चलता है… सर्दियों में जिस सूरज का इंतज़ार होता है, उसी सूरज का गर्मियों में तिरस्कार भी होता है ।
भाग्य / पुरुषार्थ
यूँ ही नहीं होतीं हाथों की लकीरों के आगे उँगलियाँ…! रब ने भी किस्मत से पहले मेहनत लिखी है…!! (सुरेश)
शास्त्र / गुरु
शास्त्र मित्रवत पर गुरु शत्रुवत व्यवहार करते दिखते हैं । मुनि श्री सुधासागर जी
धीरज
सफलता की ऊंचाई पर हो तो धीरज ज़रुर रखना चाहिये, क्योंकि… पक्षी भी जानते हैं , कि आकाश में बैठने की जगह नहीं होती। (दिव्या)
सफ़र
असल में वही जीवन की चाल समझता है… जो सफ़र में आयी धूल को गुलाल समझता है । (अनुपम चौधरी)
प्रेम
???????????????????????????????????????? “चाबी” से खुला “ताला” बार बार “काम” में आता है, और “हथौड़े” से “खुलने” पर दुबारा काम का नहीं रहता । इसी तरह “संबन्धों”
नियम
घड़ी की सुईयाँ अपने नियम से चलती हैं, इसलिए लोग घड़ी पर विश्वास करते हैं । आप भी नियम से चलोगे तो, लोग आप पर
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