Category: डायरी
तस्वीर / तकदीर
ज़िन्दगी तस्वीर भी है और तकदीर भी, फर्क रंगों का है । मनचाहे रंगों से बने तो तस्वीर, और अनजाने रंगों से बने तो तकदीर
कुत्ते की पूँछ
कुत्ते की पूँछ सीधी करने का तरीका – कुत्ते को बेस्वाद/कम भोजन दो (कमजोर हो जायेगा, पूँछ लटक जायेगी ) । मन/ विकारों को नियंत्रित
निर्विकल्प
विचार का चूहा, मन के पटल पर, उभरना चाहे, बिल से झाँके, ध्यान की बिल्ली, निश्चल पाषाणवत्, दृष्टि बिल पर केंद्रित, ताक में बैठी, घात
सब्र
जिसमें सब्र है, वही तो शबरी है…. और जो शबरी हो गया, उसे ईश्वर तक नहीं जाना पड़ता, अपितु स्वयं ईश्वर उसके द्वार पर आया
ज़िन्दगी का रहस्य
ज़िन्दगी का यह एक बहुत बड़ा रहस्य है… हम जानते हैं कि हम किसके लिए जी रहे हैं, लेकिन ये कभी नहीं जान पाते कि
श्रद्धा / अनुभव
श्रद्धा – मेरा डॉक्टर/धर्म ठीक कर देगा, अनुभव – मेरा डॉक्टर/धर्म ही ठीक कर पायेगा । यदाकदा(जब बीमारी असाध्य/पापोदय तीव्र हो) ठीक ना हो पायें
Mind / Matter
All the problems are stuck between ‘Mind’ & ‘Matter’. If you don’t ‘Mind’, it doesn’t ‘Matter’. (???? Pranjal ????)
पुरुषार्थ
महामारी की वज़ह से मंदिर बंद/ पूजादि कर नहीं पारहे हैं । लेकिन TV पर देखकर continue रक्खें, कहीं आदत ही न छूट जाय ।
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