Category: वचनामृत – अन्य

पढ़ाई

ज्यादा पढ़े तो घर से जाये, कम पढ़े तो हल* से जाए। *खेती के काम के नहीं, ज्ञान बिना खेती कैसे होगी ! निर्यापक मुनि

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जैन साधु

जैन साधु की पहचान, पदयात्री तथा करपात्री। पदयात्री – जीवनपर्यन्त पैदल चलते हैं। करपात्री – जीवनपर्यन्त हाथ में भोजन करना/ बर्तनों में नहीं। मुनि श्री

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नारियल

नारियल को “श्रीफल” इसके अनेक गुणों के कारण कहते हैं। अन्य फलों से इसमें एक और विशेषता होती है कि यह रस अलग से बनाता

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क्षत्रिय

जो पापों पर घात करे, उन्हें जीते वह क्षत्रिय । मुनि श्री अजितसागर जी (सबसे बड़े दुश्मन तो पापकर्म ही हैं)।

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वर्ण लाभ/संकर

वर्ण लाभ… दोनों वर्णों को लाभ जैसे दूध और पानी। वर्ण संकर… दूध में नीबू जैसे देहाकर्षण से शादी/ गुणवत्ता को गौण करके। मुनि श्री

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मूल से जुड़ना

जब तक पुष्प मूल से जुड़ा रहता है तब तक ही उसकी सुंदरता और सुगंधि बनी रहती है। मुनि श्री विनम्रसागर जी

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पुण्य अर्जन

पुण्य अर्जन का सरल तरीका –> पुण्य के फल का त्याग। मुनि श्री प्रमाणसागर जी

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सहजता

शरीर, सम्पत्ति तथा समय हमको सहजता से प्राप्त हुआ, सहजता प्राप्त करने के लिये। विडम्बना… हमने इसे ही असहजता प्राप्त करने के लिये उपयोग कर

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दर्द

कांटे में तकलीफ़/दर्द नहीं, शरीर में भी नहीं। जब कांटा शरीर में लगता है तब दर्द होता है। आत्मा में दु:ख नहीं, शरीर में भी

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Charming

अंग्रेजी शब्द “Charm”, चर्म से बना है। तो “Charming” का क्या अर्थ बना ? त्वचा को महत्व ! मुनि श्री प्रणम्यसागर जी

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मंगल आशीष

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