Category: वचनामृत – अन्य
दान
दान को खर्चे में कभी मत डालना। खर्चा होने पर लौटकर नहीं आता जबकि दान ब्याज सहित लौटकर आता है/ बीज रूप है। निर्यापक मुनि
संवाद / विसंवाद
संवाद → संवाद से शंकायें दूर होती हैं, सामंजस्य बैठता है। विसंवाद → 1. सत्य जानते हुए भी सामने वाले के तथ्यों को काटना। 2.
सुख
सुख की तासीर है सुप्तता। सो सुख में सावधानी अत्यंत आवश्यक है। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी
मृत्यु
जब मृत्यु निश्चित है तो डर क्यों? अपने कर्मों तथा कर्म-सिद्धांत पर विश्वास की कमी। ध्यान/ Meditation के अभ्यास की कमी (जो ध्यान में मृत्यु
मंत्र
मंत्र दो प्रकार के → उपासना मंत्र → इसमें किसी उपास्य का नाम नहीं, अपनी आलोचना नहीं, मात्र वंदना भाव (जैसे णमोकार)। बीज मंत्र →
तप
ये तन तेरा कोयला, धो-धो काला होय। तप अग्नि में गर जले, चाँदी-चाँदी होय।। घड़ा अग्नि में तप कर ही पानी को शीतलता प्रदान कर
सभ्यता / संस्कार
सभ्यता जो सबके सामने दर्शायी जाए। जो प्राय: सभी लोग अच्छे से निभा लेते हैं। संस्कार अकेले में पता लगते हैं। जो आपका असली व्यवहार/
घर
घर के मुख्य भाग हैं… ड्राइंग रूम, बेडरूम, किचन और स्टोर रूम। ड्राइंग रूम.. जहाँ पुरस्कार रखे जाते हैं लोगों को दिखाने के लिए। पुरानी
प्रतिभा / दीक्षा
आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के 25 ब्रह्मचारी जिनमें कुछ इंजीनियर, पोस्ट ग्रेजुएट, एल.एल.बी. आदि थे। उनको एक साथ दीक्षा दी गई। अगले दिन टिप्पणी
विनाश
बड़े/ पूज्य जैसे पिता/ गुरु अपनी खुद की चिंता/ भला करने लगें; पिता कमाये छोटे बैठे रहें, तो दोनों का विनाश। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर
Recent Comments