Category: वचनामृत – अन्य

जीव रक्षा

वैष्णव मतानुसार श्रीकृष्ण ने छोटा गोवर्धन उठाया, हनुमान ने तो हिमालय का बड़ा पर्वत खंड*, फिर प्रसिद्धि कृष्ण को ज़्यादा क्यों ? कृष्ण ने बहुत

Read More »

पूजादि

पूजा आदि स्टेशन पहुँचने की क्रियायें हैं। व्रत आदि रेल/ धर्म/ मोक्ष मार्ग की यात्रा। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

Read More »

पूजादि

पूजा → गुणगान करना। अर्चना → समर्पण, पूजा के साथ (द्रव्यादि)। वंदना → गुणी के आगे झुकना। निर्यापक मुनि श्री वीरसागर जी

Read More »

मोह / व्यामोह

जैसे शराब पीना मोह, नशा चढ़ना व्यामोह। मोह तो ज्ञानी को भी हो सकता है पर उसे व्यामोह नहीं होगा। निर्यापक मुनि श्री सुधासागर जी

Read More »

दान

दान… अकेले में दें तो गुप्त। समारोह में बताकर ताकि औरों को प्रेरणा मिले, अनुमोदना करने का अवसर मिले और आप निमित्त बनें। मुनि श्री

Read More »

देहरी

देहरी के फायदे –> देखकर चलोगे तो कीड़ों की भी रक्षा होगी। बाहर के कीड़े अंदर नहीं आयेंगे। बाहर की -ve Energy अंदर आने से

Read More »

आध्यात्मिकता

जरूरतों को कम, इच्छाओं को दुर्बल करना आध्यात्मिकता है। मुनि श्री प्रमाणसागर जी

Read More »

सेवा

सेवा प्रशंसनीय है, यदि उसमें ममत्व* न हो। मुनि श्री प्रणम्यसागर जी * धन, प्रतिष्ठा आदि से भी न हो।

Read More »

यंत्र/मंत्र/तंत्र

सृष्टि इन तीनों से ही चलती है। यंत्र, मंत्र हमको मजबूत करते हैं, जंगली पौधे जैसे मुसीबतें झेलता हुआ बढ़ता रहता है। तंत्र (साधन) कमज़ोर/पराधीन

Read More »

धर्म/संकट

धर्म वो नहीं जो संकटों को टाल दे, बल्कि वो जो संकटों में सम्हाल ले। देखा जाए तो धर्मात्माओं पर संकट आते तो है पर

Read More »

मंगल आशीष

Archives

Archives
Recent Comments

July 9, 2026

August 2026
M T W T F S S
 12
3456789
10111213141516
17181920212223
24252627282930
31