Category: वचनामृत – अन्य
सुख
सबसे कम शब्दों/ समय में सुख की परिभाषा बता दें। गुरु मौन हो गये। थोड़ी देर बैठ कर जिज्ञासु चला गया। अगले दिन आभार प्रकट
साधु / गृहस्थ
साधु की Dress एक, Address अनेक। गृहस्थ की Dress अनेक, Address एक। मुनि श्री प्रमाणसागर जी
भरोसा
कच्चा घड़ा है, काम में मत लेना, बिना परीक्षा। आचार्य श्री विद्यासागर जी
आलोचना
आलोचना की आदत पड़ जाती है (प्राय: पीठ पीछे), निंदा → सामने वाले को नीचा दिखाने को (प्राय: व्यक्ति के सामने), समालोचना → सामने वाले
मोह
जब हमें कोई धोखा देता है/ हमारा अहित करता है, उसे हम बैरी मानते हैं। लेकिन मोह युगों से हमें धोखा देता आ रहा है/
प्रवृत्ति / निवृत्ति
प्रवृत्ति में व्यवहार, नीति, धर्म। निवृत्ति में निश्चय, अध्यात्म। मुनि श्री प्रमाणसागर जी
कर्मफल
पत्थर ऊपर फेंकने पर कम तेजी से जाता है। लौटता बहुत तेजी के साथ, सिर फोड़ देता है। कर्म ऊपर जाते पत्थर हैं, कर्म-फल लौटते
मन / वचन / काय
मन → बालक (चंचल)। वचन → पिता, कड़े शब्दों का प्रयोग। काय → माँ, पिटाई भी कर देती है। मुनि श्री मंगल सागर जी
हिंसा
एक हिंसा, हिंसा के लिये → महान दोष। दूसरी हिंसा, शुभ क्रियाओं में (पूजा, मंदिर निर्माण आदि) → जघन्य दोष। जीव दोनों में मरे, दूसरी
भारत देश
विदेश भ्रमण करके लौटते समय स्वामी विवेकानंद जी ने कहा – अब मेरा भारत के प्रति दृष्टिकोण बदल गया है। पहले में उसका आदर करता
Recent Comments