किसी के पीछे ज्यादा नहीं पड़ना चाहिये –
इसका एक भव सुधारने के लिये अपने भव-भवांतर क्यों बिगाड़ना चाहते हो !
झगड़ा न करें पर Compromise भी ना करें।
मुनि श्री सुधासागर जी
सबसे बड़ा कृपण वह है जो कृपा न माने।
चिंतन
दूध, दही, मक्खन व घी का जन्म एक ही कुल में, पर कीमत अलग अलग।
कारण ?
श्रेष्ठता कुल में पैदा होने से नहीं बल्कि सद्कर्मों/स्थिरता तथा तपने से आती है।
(सुरेश)
पूजा गुणानुवाद है, भक्ति गुणानुराग – भगवान/गुरु व उनके गुणों से।
भक्ति श्रद्धा का बाह्य रूप है पर इससे आंतरिक प्रेम उत्पन्न करता है।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
जो कर्मसिद्धांत पर विश्वास करते हैं, उन्हें पुनर्जन्म पर विश्वास करना ही होगा।
वरना इस जन्म के अंत समयों में किये गये कर्मों का फल कब और किस जन्म में भोगोगे ?
चिंतन
पनही* पशु के होत हैं, नर के कछू नहीं होत।
नर यदि नर-करनी करे, तब नारायन होत।
*जूता (पशु की खाल का)
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
दो तरह से चीजें देखने में छोटी नज़र आतीं हैं –
1. दूर से
2. ग़रूर से
(अनुपम चौधरी)
जुगुनू तब तक ही चमकता रहता है जब तक वह उड़ता रहता है/सक्रिय रहता है।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
ज़िंदगी का Calculations तो बहुत बार किया, पर सुख, दु:ख का Account कभी समझ नहीं आया ।
जब Total निकाला तो कर्मों के सिवाय और कुछ Balance नहीं मिला ।
(मंजू)
एक सूर्य का प्रकाश है जो सदैव एक सा रहता है जैसे भगवान का ज्ञान।
दूसरा सूर्य के आगे आये बादलों से छन कर आया प्रकाश है, जो कम ज्यादा होता रहता है जैसे विज्ञान का।
ऐसे ही दोनों ज्ञानों में फ़र्क जानना।
चिंतन
अभाव में धर्म करना बड़ी बात नहीं,
अभाव का एहसास न होना, धर्म की बात है ।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
इस काल में तो मुक्ति नहीं, तो धर्म क्यों करें ?
लाइन में तो लग लें !
पर लाइन में लग कर क्या करोगे, जब खिड़की बंद है !
दोषों/ दुर्बलताओं/ आकुलताओं से मुक्त्ति तो आज भी है,
धर्म प्रलोभन के लिये नहीं, आत्मकल्याण के लिये करें।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
लुहार सुबह अग्नि को पूजता है ।
बाद में उसी अग्नि को घन से पीटता है ।
कारण ?
सुबह अग्नि एकाकी रहती है, बाद में वह लोहे की संगति में आ जाती है, सो घनों से पिटती है ।
एकाकी आत्मा पूज्य होती है पर कर्मों की संगति में आकर संसार में दुखी/भटकती रहती है ।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
हमारा अच्छा समय दुनियाँ को बताता है कि हम क्या हैं,
और बुरा समय हमें बताता है कि दुनियाँ क्या है।
(डॉ.एस.एम.जैन)
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