बोझ को स्वीकारते ही वह वज़न बन जाता है, बोझ नहीं लगता है ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

आत्मिक रिश्तों का कभी ब्रेक-अप नहीं होता ।
जहाँ विश्वास होता है, वहाँ चैक-अप नहीं होता ।
जी लो मन भर के,
क्योंकि….
बीते हुये समय का कोई बैक-अप नहीं होता ।

(सुरेश)

छोटा सा कंकड़ भी पानी में डूब जाता है, बड़ा भारी खंबा नहीं, क्योंकि कंकड़ की घनिष्टता ज्यादा होती है ।
पैसा थोड़ा हो, घनिष्टता ज्यादा, तो डूब जाओगे ।

शंकर न बन पाओ, पर कंकर मत बनना ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

जब एक केस की फ़रियाद के लिये वकीलों को (गर्मियों में भी) काली Uniform पहननी होती है तो असंख्यात गुनाहों की फ़रियाद के लिये (भगवान की पूजा के समय) Prescribed Dress नहीं होनी चाहिये क्या ?

मुनि श्री सुधासागर जी

उत्साह का जीवन में वही Role है जो किसी भी गाड़ी के पहियों में हवा का ।
गाड़ी का इंजन चाहे कितना ही शक्तिशाली क्यों ना हो, पहियों में हवा के बिना दौड़ नहीं सकती ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

प्रभु का रास्ता बड़ा सीधा है और बड़ा उलझा भी….
बुद्धि से चलो तो बहुत उलझा और भक्ति से चलो तो बड़ा सीधा…
विचार से चलो तो बहुत दूर और भाव से चलो तो बहुत पास…
नज़रों से देखो तो कण-कण में और अंतर्मन से देखो तो जन-जन में..

(सुरेश)

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