इनमें चमत्कार नहीं सुने, चाहे मंदिर सोने/चांदी के ही क्यों न हों ।
कारण ?
1. घरों में इतनी पवित्रता नहीं रह सकती,
2. बहुत कम लोगों की भक्ति, इन मंदिरों से जुड़ पाती है ।

मुनि श्री सुधासागर जी

The tendency to follow the path of least resistance guarantees failure in life.

इसीलिए भगवान महावीर ने महलों की आरामदायक जिंदगी छोड़ कर जंगलों का सबसे कठिन रास्ता चुना और सफलता प्राप्त कर मोक्ष पाया ।

किसी के/सबके भले के लिए शांति की भावना भाने से उसका/सबका भला हो सकता है, क्योंकि उसके जीवन में परेशानी आने से हमको अशांति होती है ( यदि उनसे हमारा संबंध हो तो )
यदि उनसे हमारा संबंध नहीं है तब हमारे दया के भाव होने से हमारा भला तो होगा ही ।

ऐसी आपदा में शांति-धारा से तो शांति प्राप्त होती, फिर मंदिर क्यों बंद किये गये ?
आग लगने पर जल-धारा डालने से शांति होती है, पर मंदिरों में संक्रामक बीमारी फैला कर फिर शांति-धारा करना कहाँ की बुद्धिमत्ता होती !

मुनि श्री प्रमाण सागर जी (29.3.20)

गुरु/धर्म कह-कह कर थक गए कि… “करो ना, करो ना”(*),
यदि कर लिया होता, तो आज यह न कहना पड़ता कि…
“करो ना”(**)
(*)…..जो करने योग्य/ करना चाहिए था
(**)…बाह्य/ क्रियात्मक मत करो

चिंतन

गंध खायी नहीं जा सकती, ऐसे ही जिसकी सौगंध ली जा रही हो जैसे “भगवान की”, तो उसे भी तो खा नहीं सकते ।
अत: सौगंध नहीं खाना चाहिये ।

मुनि श्री सुधासागर जी

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