धनोर्पार्जन के 2 तरीके –
1. Any How – धनोर्पार्जन, कैसे भी, Moral Values की चिंता किये बिना ।
2. Know How – धनोर्पार्जन विवेक से, Moral Values का ध्यान रखकर ।
Any How में मुसीबतें भी Any How आती रहतीं हैं, अकारण ।

चिंतन

भगवान के नाम की माला फेरने से फायदा ?

आ. श्री विद्यासागर जी – जैसे आयुर्वेदिक दवा को बार बार घौटने से उसकी क्षमता (रोग को दूर करने की) बढ़ जाती है, ऐसे ही बार बार भगवान का नाम लेने से श्रद्धा/विशुद्धता बढ़ती है ।

(सोमेश)

दो प्रकार की –
1. कलाई की
2. मुसीबत की
मुसीबत की खराब होने पर थोड़े समय में ठीक होगी ही ।
कलाई वाली ठीक हो भी या ना भी हो ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

मंत्र से पत्थर की मूर्ति भगवान बन जाती है, पर मनुष्य ?
मनुष्य मंत्र से नहीं, गुरु की मंत्रणा से मूर्ति रूप भगवान ही नहीं स्वयं साक्षात भगवान बन सकते हैं ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

मन तो चंचल ही होता है, चाहे साधु का ही क्यों न हो !

आ. श्री शांतिसागर जी – पर साधु मन के विकल्पों को समाप्त कर देते हैं सो एक (धर्म) जगह टिका रहता है जैसे समुद्र के बीच जहाज पर बैठा पक्षी ।

मुठ्ठी बांधे आते हैं (पुण्य लेकर; मनुष्य ही) हाथ पसारे जाते हैं (पुण्य खर्च करके),
फिर भी वैभव को मुठ्ठी में बांधे रखने की कोशिश करते रहते हैं ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

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