भाग्य – बासी पूड़ी,
पुरुषार्थ – ताजी पूड़ी ।
आटा दोनों में same.
क्रिया और विचारों का संस्कार ही संस्कृति है ।
मुनि श्री प्रमाणसागर जी
निमित्त मिलने पर, नैमित्तिक-भावों से क्रोध आता है ;
ये निमित्त बाह्य या अंतरंग भी हो सकते हैं ।
2) क्रोध अज्ञानी को ही आता है ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
Think big plans,
but
act on the small things.
बीज मिट्टी में दब कर सहता है तभी विशाल वृक्ष बनता है ।
जिस कंडक्टर ने गांधी जी को बेईज्ज़त करके ट्रेन से उतारा, उसका नाम कोई नहीं जानता, गांधी जी विश्व-विख्यात ।
ज्ञान नहीं होना, अज्ञान नहीं;
विपरीत ज्ञान ही अज्ञान है ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
Pleasure needs sacrifice .
सीप में पैदा हुआ मोती, हार/भगवान के लिये प्रयोग होता है,
जन्म-दात्री सीप नहीं !
मान तभी आता है, जब हम मान लेते हैं (कि हम बड़े हैं) ।
निर्यापक मुनि श्री वीरसागर जी
Experience is simply the name we give to our mistakes.

(Manju)
मान्यतायें सबकी अलग अलग हो सकती हैं ।
सही/गलत का निर्णय प्रयोग (चारित्र) से ही हो सकता है ।
आचार्य श्री विद्यासागर जी
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