नियम लेने से पहले अपनी क्षमता और आसपास के वातावरण को ध्यान में रखें ।
नियम लेने के बाद उसे बनाये रखने के फायदे और तोड़ने के दुष्परिणामों का विचार करें, तो नियम कभी टूटेंगे नहीं ।

धर्म को Washing Powder ना मानें कि पहले प्रयोग करें फिर विश्वास करें,
बल्कि बीमा जैसा मानना – “जीवन के साथ भी, जीवन के बाद भी”

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

एक जुट हों,
एक से जुड़ें नहीं,
बेजोड़* बनें ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

* अपूर्व/अखंड/बिना जोड़/मतभेद रहित

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