श्रेष्ठ – जो श्रेष्ठ कार्य करता है,
परम श्रेष्ठ – जिसका नाम (गुरु/भगवान) लेने से कार्य श्रेष्ठ हो जाते हैं ।

गोचरी-वृत्ति याने जैसे गाय नीचे मुँह करके/बिना इधर उधर देखे अपना भोजन करती रहती है ।
ऐसे ही साधु-प्रवृत्ति वाले भी अपने काम से काम रखते हैं ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

Archives

Archives

April 8, 2022

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930