विज्ञान प्रयोगों पर आधारित, निर्णय बदलते रहते हैं,
वीतराग विज्ञान, आत्मानुभव पर आधारित, ना बदलने वाला ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

समीचीन उद्देश्य बनाने के लिये ज्ञान की आवश्यकता है,
पर उसे पूर्ण करने के लिये ध्यान की ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

क्या विदेशों के पेड़ ज्यादा हरे और ज्यादा घने होते हैं ?

नहीं, पर वे ज्यादा उगाते हैं/उनका रक्षण ज्यादा करते हैं ।
गुणों का भी यही स्वभाव है – कुछ लोग ज्यादा उगा लेते हैं/उनकी रक्षा करते रहते हैं, कुछ समाप्त कर लेते हैं ।

चिंतन

समस्या आने पर न्याय नहीं, समाधान होना चाहिये;
क्योंकि…
न्याय में एक के घर दीप जलते हैं,
लेकिन
दूसरे के घर अँधेरा होता है ।
मगर समाधान में…
दोनों के घर दीप जलते हैं ।

(सुरेश)

( विंगकमांडर अभिनंदन के लौटने से भारत में तो दीपक जलेंगे ही,पाकिस्तान के प्रति द्वेष की अग्नि भी कम होगी )

क्या 2 रोटी खाने वाले से 10 रोटी खाने वाले का पुण्य ज्यादा होता है ?
नहीं, यदि 2 रोटी खाने वाला, 10 रोटी वाले से ज्यादा तृप्ति अनुभव कर रहा है तो उसके पुण्य ज्यादा है ।

3 प्रकार का –                                                                        तामसिक – हर समय चिड़-चिड़ करते रहना,
राजसिक – अपना रौब बनाये रखने के लिये ,
सात्विक – सामने वाले की भलाई के लिये ,
इसमें प्रवृति बदल जाती है, समझाना भी आ जाता है ।

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