सुख तात्कालिक होता है ।
हित कागज़ों में लगे पिन जैसा होता है जो जोड़कर तो रखता है पर चुभता भी है ।
क्यों ना हम Clip बन जाय – सुखकारी भी, हितकारी भी ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

जीवन में जब भी हम ख़राब दौर से गुजरते हैं… तब मन में यह विचार ज़रूर आता है कि…

परमात्मा मेरी परेशानी देखता क्यों नहीं है !
मेरे दुःख कम क्यों नहीं करता !!
पर याद रखना…
जब परीक्षा चल रही होती है, तब शिक्षक मौन रहता है !

(मँजु)

ज्ञान पूर्ण नहीं तो धर्म को भी अपूर्ण मानें ?
ज्ञान अभिव्यक्ति है इसलिये अपूर्ण, धर्म अनुभूति है इसलिये पूर्ण ।

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

लोग मेरी कमियाँ बताते हैं तब मेरा भी मन करता है – मैं भी उनकी कमियाँ बताऊँ, पर बता नहीं पाता, क्योंकि मुझे उनमें कमियाँ दिखती ही नहीं ।

श्री लालमणी भाई

(और दिख भी जाती हैं तो बता नहीं पाता, उन्हें दु:ख होगा)

जब जल गंदा हो जाता है
तो उसे हिलाते नहीं, शांत छोड़ देते हैं ,
धीरज रखते हैं…….,
गंदगी अपने आप नीचे बैठ जाती है….
साफ जल अपने आप ऊपर आ जाता है…..

इसलिये जो धीरज रख सकता है,
वह अपना इच्छित सब कुछ पा सकता है….

स्पीडब्रेकर कितना भी बड़ा हो,
गति धीमी करने से झटका नहीं लगता ।

उसी तरह मुसीबत कितनी भी बड़ी हो,
शांति से विचार करने पर, जीवन में झटके नहीं लगते ।

???? सुरेश ????

डॉक्टर के पास दर्शनार्थी बनकर जाओगे तो इलाज नहीं हो पायेगा, शरणार्थी बनने पर ही लाभ होगा ।
ऐसे ही गुरु/भगवान के पास शरणार्थी बनकर जाने में ही लाभ होगा ।

विचारों/भावनाओं को नियंत्रित करना कठिन है, क्रियाओं को आसान ।
पर भावनायें और क्रियायें आपस में Connected रहती हैं ।
सो क्रियाओं में प्रसन्नता दर्शायें, चिंतायें/भावनायें अपने आप सुधर जायेंगी ।

(श्रीमति शर्मा)

जोकर अपने आपको कलाकार मानता है, पर दुनिया जोकर ! ऐसा क्यों ?
क्योंकि उसका आचरण जोकर जैसा है ।
इसीलिये दुनिया को हंसाता है/दुनिया उस पर हंसती है, पर वह कभी नहीं हंस पाता ।

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

September 2026
M T W T F S S
 123456
78910111213
14151617181920
21222324252627
282930