संसार में असंतुष्ट प्राणी वैराग्य लेने के बाद भी उन चीजों को पाने में लग जायेगा, जिनकी कमी वह संसार में अनुभव करता था ।
पर अनासक्त भाव दोनों क्षेत्रों में लाभकारी होता है ।

गुरुवर मुनि श्री क्षमासागर जी

आज गुरुदेव का समाधि-दिवस है ।

5 छिद्रों वाले घड़े को कैसे भरेंगे ?

गुरु ने मुस्कान के साथ उत्तर दिया -पानी में ही डूबा रहने दो ;भरा ही रहेगा !

इसी तरह हमारी 5 इन्द्रियाँ परमात्मा में ही डूबी रहेंगी तो संसार क्या बिगाड़ लेगा !

तन की जाने, मन की जाने,
जाने चित की चोरी ।

(धर्मेन्द)

मीठा मीठा सुनोगे तो सुगर बढ़ जायेगी,
करेला/मिर्ची खाओगे तो घट जायेगी (विष से ही विष कटता है) ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

पाप परिस्थिति नहीं कराती, मन:स्थिति कराती है ।
जिस परिस्थिति में रागी पाप करता है, उसी परिस्थिति में वैरागी पुण्य करता है ।

क्षु. श्री ध्यानसागर जी

एक तरफ भगवान के दर्शन हों, दूसरी ओर चींटी की रक्षा तो पहले चींटी की ओर देखो ।
चींटी की ओर देखोगे तो भगवान बनोगे,
भगवान की ओर देखोगे तो (यदि चींटी मर गयी तो !) चींटी बनोगे ।

मुनि श्री सुधासागर जी

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