ज्योति की कालिख़, धुंआ है ।
(मानवीय गुणों की कालिख़ आलोचना है)

मुनि श्री प्रमाणसागर जी

जीवन/संगीत/पूजा सब में उचित अनुपात बहुत जरूरी है, तभी आनंद आयेगा, क्रिया कार्यकारी होगी । अनुपात बिगड़ा, आपात स्थिति आती है ।

आचार्य श्री विद्यासागर जी

चोर साधुओं के पास इसलिये नहीं जाते, क्योंकि उनके पास वह सब नहीं है जो उन्हें चाहिये ।
यदि हम भी उनके पास नहीं जा रहे है हैं तो हम क्या हुए !!

मुनि श्री सुधासागर जी

Archives

Archives
Recent Comments

April 8, 2022

November 2026
M T W T F S S
 1
2345678
9101112131415
16171819202122
23242526272829
30