Never try to become SUPER-HUMAN,
realise the capacity of being HUMAN,which is SUPER.
Why do we miss SUPER qualities ?
Because…
Normally we discover our limitations, not possibilities.
So,what to do ?
Focus on what you can do, not what you can not do.
ये नादानी भी बेमिसाल है –
“अँधेरा दिल में है,
दिये मंदिर में जलाये जाते हैं ”
(मंजू)
मनुष्य का अपना क्या है..!?
– जन्म : दूसरों ने दिया,
– नाम : दूसरों ने रखा,
– शिक्षा : दूसरों ने दी,
– रोजगार : दूसरों ने दिया,
और . . .
– शमशान : दूसरे ले जाऐँगे.
-तो व्यर्थ मेँ घमंड़ किस बात पर करते हैँ लोग ??
(श्रीमति एकता – पुणे)
” ज़िंदगी ”
बदलने के लिए लड़ना पड़ता है
और
आसान करने के लिए समझना पड़ता है ।
अंग्रेज़ ने पूछा:
भारतीय स्त्रियाँ हाथ क्यों नहीं मिलाती हैं?
स्वामी विवेकानंद जी ने जवाब दिया…
क्या आपके देश में कोई साधारण व्यक्ति
आपकी महारानी से हाथ मिला सकता है ??
अंग्रेज़- “नहीं”
स्वामी विवेकानंद-
हमारे देश में हर एक स्त्री महारानी होती है।
जिसे आप समझना चाहते हैं,
उसके साथ आपको बैठना पड़ेगा;
तभी आप उसे समझ पायेंगे।
खुद के साथ मौन में बैठना शुरु करें।
(सुरेश)
खूबसूरत रिश्ता है मेरा और भगवान के बीच…… ज़्यादा मैं माँगता नहीं, कम वो देता नहीं ।
( नीलमा )
अपने मन रूपी खेत में दूसरों के प्रति वैमनस्य रूपी विष बीज ड़ालेंगे तो फसल तो विष रूप ही होगी ना !
भोगनी तो तुम्हें ही पड़ेगी ना !
चिंतन
घड़ी की टिक-टिक को
मामूली न समझो !
बस यूँ समझ लीजिये…
” ज़िंदगी ” के पेड़ पर
ये समय रूपी कुल्हाड़ी
के वार हैं !!
बारिश की बूँदें, भले ही छोटी हों, लेकिन उनका लगातार बरसना बड़ी बड़ी नदियों का बहाव बन जाता है.
ऎसे ही हमारे छोटे छोटे और अच्छे प्रयास निश्चित ही ज़िंदगी में बड़ा परिवर्तन लाने में सक्षम होते हैं ।
(अभिषेक-ग्वालियर)
इस मार्च एन्डिंग में, जीवन की बैलेंस शीट जांचने की इच्छा हुई,
तो पाया कि प्रेम,स्नेह,आत्मीयता,भाईचारा और कर्तव्यनिष्ठा के खाते ही गायब हैं।
मन के ‘मुनीम’से पूछा तो वो बोला –
सर जी, वर्षो से इनके साथ कोई लेनदेन हुआ ही नहीं।
ना जाने कितने रिश्ते ख़त्म कर दिये इस भ्रम ने-
कि मैं ही सही हूँ,
और सिर्फ़ मैं ही सही हूँ….!!
पूजा श्रद्धा का विषय है, सेवा संवेदना का ।
श्रद्धा के साथ संवेदना और प्रबल व श्रेष्ठ हो जाती है ।
लौकिक दान जीवन निर्वाह के लिये ।
अलौकिक, जीवन निर्माण के लिये ।
सम से सम्पदा बना,
यानि अपने और दूसरों के माध्यम से अर्जित की जाती है ।
अत: इसका उपयोग भी दोनों के लिये होना चाहिये ।
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